CBI फॉरेंसिक का खुलासा: लातूर के ट्यूटर के फोन से मैच हुए NEET-UG के 111 सवाल

CBI द्वारा दिल्ली अदालत में पेश किए गए फॉरेंसिक सबूतों से पता चलता है कि लातूर के एक ट्यूटर के फोन और आधिकारिक NEET-UG मास्टर सेट के बीच 81% मैच था, जिससे एक बड़े पेपर लीक का खुलासा हुआ है।

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CBI फॉरेंसिक का खुलासा: लातूर के ट्यूटर के फोन से मैच हुए NEET-UG के 111 सवाल
मुख्य बातें
  • 1डिजिटल ट्रेल की जांच कर रहे जांचकर्ताओं ने स्थानीय शिक्षक संजय अमीन शेख पर ध्यान केंद्रित किया, जिनके फोन में परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले एक PDF दस्तावेज मौजूद था।
  • 2भारत में परीक्षाओं को लेकर अत्यधिक दबाव की संस्कृति एक बेहद आकर्षक ब्लैक मार्केट तैयार करती है, जहां माता-पिता लीक हुए पेपर के लिए 25 लाख रुपये तक का भुगतान करते हैं।
  • 3जब्त किए गए फोन पर मिले 136 सवालों में से 111 सवाल आधिकारिक NTA मास्टर सेट से मैच हुए।

परीक्षा के दिन सुबह 8:12 बजे प्राप्त एक सिंगल डिजिटल फाइल में भारत की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा का ब्लूप्रिंट शामिल था। जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने महाराष्ट्र के लातूर में एक स्थानीय ट्यूटर का मोबाइल फोन जब्त किया, तो उन्हें एक ऐसा डिजिटल फुटप्रिंट मिला जो स्थानीय कोचिंग सेंटरों को सीधे इस सिस्टेमिक लीक से जोड़ता है। यह केवल कोई सामान्य लीक नहीं था; यह एक बेहद सुनियोजित ऑपरेशन था।

CBI ने लातूर कनेक्शन का खुलासा कैसे किया

डिजिटल ट्रेल की जांच कर रहे जांचकर्ताओं ने स्थानीय शिक्षक संजय अमीन शेख पर ध्यान केंद्रित किया, जिनके फोन में परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले एक PDF दस्तावेज मौजूद था। CBI के फॉरेंसिक विश्लेषण से पता चला कि उनके डिवाइस पर सेव किए गए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 136 सवालों में से 111 सवाल आधिकारिक NTA मास्टर प्रश्न पत्र के सीक्वेंस से मैच कर रहे थे। एजेंसी ने इस टाइमलाइन को दिल्ली हाई कोर्ट के सामने पेश किया, जिससे यह साबित होता है कि लीक पहले उम्मीदवार के परीक्षा देने बैठने से काफी पहले ही हो चुका था।

स्थानीय पुलिस ने शुरुआत में इसे नकल की एक मामूली घटना माना था, लेकिन डिजिटल फाइलों के बड़े पैमाने को देखते हुए केंद्रीय एजेंसी को इसमें दखल देना पड़ा। डिलीट किए गए व्हाट्सएप डेटाबेस की फॉरेंसिक रिकवरी पूरी जांच में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। 81.6% की मैच दर किसी भी तरह के इत्तेफाक की गुंजाइश को खारिज करती है, और इसकी जगह किसी अंदरूनी सूत्र या डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन में किसी बड़ी खामी की ओर इशारा करती है।

111 सवालों के मैच होने का गणित

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिक्रिप्शन कीज़ (decryption keys) ही इस विफलता की मुख्य वजह हो सकती हैं। NTA परीक्षा पत्रों को सुरक्षित प्रिंटिंग प्रेस और स्थानीय बैंक वॉल्ट्स में डिजिटल रूप से वितरित करता है, जिसमें डुअल-लेयर एन्क्रिप्शन का उपयोग किया जाता है जो परीक्षा से केवल 45 मिनट पहले ही अनलॉक होना चाहिए। हालांकि, लातूर लीक से संकेत मिलता है कि किसी ने निर्धारित डिक्रिप्शन समय से बहुत पहले ही मास्टर सेट तक पहुंच बना ली थी।

डिजिटल ट्रेल से पता चलता है कि PDF को एक हाई-रिज़ॉल्यूशन स्कैनर का उपयोग करके तैयार किया गया था, जो वितरण से पहले प्रिंटेड शीट्स तक भौतिक पहुंच (physical access) की ओर इशारा करता है। यह उस शुरुआती थ्योरी को खारिज करता है कि लीक केवल बिहार के एक परीक्षा केंद्र तक ही सीमित था। अदालती दस्तावेजों से पता चलता है कि लीक हुई फाइल को एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए प्रसारित किया गया था, जिससे आरोपियों को लगा कि वे अपने निशान मिटा देंगे। लेकिन मेटाडेटा झूठ नहीं बोलता। CBI ने ट्यूटर के डिवाइस से डिलीट किए गए डेटाबेस को रिकवर किया, जिससे फाइल मिलने के सटीक समय का पता चल सका।

📌 मुख्य बिंदु: लातूर लीक पहला ऐसा ठोस फॉरेंसिक लिंक है जो दिखाता है कि यह गड़बड़ी किसी स्थानीय परीक्षा केंद्र में नकल के बजाय सीधे मास्टर-सेट स्तर पर हुई थी।

केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली की सिस्टेमिक खामियां

भारत में परीक्षाओं को लेकर अत्यधिक दबाव की संस्कृति एक बेहद आकर्षक ब्लैक मार्केट तैयार करती है, जहां माता-पिता लीक हुए पेपर के लिए 25 लाख रुपये तक का भुगतान करते हैं। 24 लाख से अधिक छात्र 1,10,000 से भी कम मेडिकल सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, ऐसे में धोखाधड़ी के लिए वित्तीय प्रलोभन बहुत बड़ा है। यह दबाव कोचिंग संस्थानों को अपने नामांकित छात्रों के लिए उच्च रैंक सुरक्षित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को मजबूर करता है।

"लातूर लीक का पैमाना यह दर्शाता है कि अब हम केवल कुछ भ्रष्ट निरीक्षकों से नहीं निपट रहे हैं, बल्कि एक ऐसे परिष्कृत सिंडिकेट से निपट रहे हैं जो हमारी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसियों के मुख्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने में सक्षम है," एक दशक से परीक्षा सुधारों पर नजर रख रहे नीति विश्लेषक डॉ. आनंद रंगनाथन ने कहा। हजारों केंद्रों में वितरित किए जाने वाले पेपर-आधारित परीक्षाओं का वर्तमान मॉडल बुनियादी रूप से त्रुटिपूर्ण है।

जांच में वितरण नेटवर्क में गंभीर सुरक्षा कमियों का खुलासा हुआ है:

  • क्षेत्रीय समन्वयकों को मास्टर कीज़ (master keys) का असुरक्षित डिजिटल ट्रांसमिशन।
  • प्रिंटिंग सुविधाओं पर रीयल-टाइम एक्सेस लॉग की कमी।
  • वितरण केंद्रों पर थर्ड-पार्टी सुरक्षा कर्मचारियों की अपर्याप्त पृष्ठभूमि जांच (background checks)।
  • आधिकारिक समन्वय के लिए सामान्य मैसेजिंग ऐप्स का उपयोग।

मुख्य तथ्य

  • जब्त किए गए फोन पर मिले 136 सवालों में से 111 सवाल आधिकारिक NTA मास्टर सेट से मैच हुए।
  • CBI ने हालिया सुनवाई के दौरान अपनी फॉरेंसिक रिपोर्ट सीधे दिल्ली हाई कोर्ट को सौंपी।
  • इस विवादित परीक्षा चक्र के लिए 24 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था।
  • लीक हुए प्रश्न पत्र के पैकेट की कीमत कथित तौर पर प्रति छात्र 25 लाख रुपये तक पहुंच गई थी।

निष्कर्ष

लातूर का यह खुलासा भारत में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब नकल के वित्तीय और सामाजिक लाभ इतने अधिक हों, तो क्या कोई एकल, केंद्रीकृत परीक्षा कभी पूरी तरह से सुरक्षित हो सकती है? यदि NTA अपने मास्टर सेट की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता है, तो मेडिकल प्रवेश की पूरी प्रणाली को वापस राज्य-स्तरीय बोर्डों को सौंपना पड़ सकता है या पूरी तरह से कंप्यूटर-आधारित परीक्षा मॉडल पर स्थानांतरित करना पड़ सकता है।

FAQ

CBI ने पाया कि लातूर के ट्यूटर के फोन पर मिले 136 सवालों में से 111 सवाल आधिकारिक NTA मास्टर सेट के समान थे।

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